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D.r HIMANSHU SHARMA

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चार सवाल

Posted On: 13 Jun, 2013 Others में

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चार सवाल

राजा जगदीश सिंह (काल्पनिक नाम ) के ऊपर किसी दूसरे राजा ने आक्रमण के लिये फौज खड़ी कर दी मगर जगदीश सिंह लड़ाई नहीं चाहते थे । उन्होने उस राजा से निवेदन किया की आप अपनी सेना को वापस ले जाओ,मगर दूसरा राजा हट्ठी था उसने कहा मै अपनी फौज को या तो युद्ध हारने के बाद वापस ले जाऊँगा या ,तुम्हे मेरे चार सबालों का उत्तर देना पडेगा ,जगदीश सिंह उसकी बात पर राजी हो गये और चार सबालों पर रजाबंद हो गये दूसरे राजा ने कहा अगर तुम मेरे इन सबालों का जबाब नहीं दे पाये तो तुमको बिना किसी युद्ध के अपनी हार स्वीकार करनी होगी, जगदीश सिंह सहमत हो गये और अपने पुत्र के कहने पर सबाल तथा दो माह का समय माँग लिया वह राजा सहमत हो गया और उसने अपने इन सबालों का जबाब माँगा ,

,सबाल १ -असल के कम असल ।
२ -कम असल के असल ।
३ -सराय का कुत्ता ।
४ -धोबी का गधा ।

ये मेरे चार सबाल है और आपके पास दो माह का समय है, जगदीश सिंह ने कहा ठीक है फिर राजा ने अपनी सेना वापस कर ली ।
राजा जगदीश सिंह ने अपने पुत्र चंदन सिंह (काल्पनिक नाम) से कहा कि पुत्र तुम सब कुछ जानते हो और निवारण की बात सोचो पुत्र ने पिता से कहा
कि पिता जी मै दुश्मन राजा के राज्य मे जाकर व्यापार की अनुमति चाह्ता हूँ और वही जाकर उनके सबालों का जबाब दूँगा ,अब मै जाने की अनुमति चाहूँगा पिता ने पुत्र को विजय कामना के साथ विदा किया ।

अब राजा जगदीश सिंह के पुत्र चन्दन ने अपने शत्रु राजा के राज्य मे जाकर व्यापार की शरूआत की और सब्जी का व्यापार शरू किया अब उसने अपने पिता से धन मंगबाया और सभी सब्जी मण्डियों से सारी सब्जी खरीदकर अपने गोदामों में रखबा दी ,अब तो निरंतर यही प्रयास जारी रहा पूरे राज्य मे हाहाकार मच गया अब सभी सेठों ने संगठन बनाकर यह बात राजा के पास तक पहुँचाई यह सुनकर राजा ने चन्दन को बुलाने का संदेश भेज दिया ।

चन्दन ने लोगो से पूंछा कि राजा के यहाँ जाने पर क्या नजराना देना पड़ता है तब लोगों ने बताया कि कोई सौ सिक्के दे आता है तो कोई दो सौ यह सुनकर लड़के ने अपने पिता जगदीश सिंह से विचार विमर्श किया ,जगदीश सिंह ने चन्दन से कहा कि तुम नजराने में एक हजार सौने की अशर्फी लेके जाना अब तो चन्दन अपने मुनीमों के साथ राजा के महल की और चल पड़ा । राजा ने चन्दन का सेठ जी आओ कहकर स्वागत किया और अनुग्रह किया कि आप अपनी सब्जी को बाजार मे बेचे और अपना मुनाफा जोड़ कर हमको बता दे इस बात पर चन्दन राजी हो गया और वापस जाते समय राजा को अशर्फी की पोटली देकर वापस हो गया ।
अब राजा के मंत्रियों ने चन्दन के जाने के बाद उस पोटली को खोलकर देखा तो उसमे एक हजार अशर्फी देखकर सेठ को काफी रहीस होने की बात कही ,राजा खुश हो गया और व्यापार बढाने का निमन्त्रण चन्दन को भेज दिया अब तो चन्दन का व्यापार बढ़ता गया समय -समय पर चन्दन राजा को नजराना भेजता रहता अब तो राजा के यहाँ चन्दन की खूब उठ बैठ हो गई ,एक दिन शहर के सबसे बडे सेठ ने चन्दन से अपनी बेटी का रिश्ता करने की बात राजा से कही राजा ने रिश्ते की बात चन्दन सेठ से की तब चन्दन ने राजा से कहा कि महाराज मुझे एक असल लड़की से शादी करनी है राजा ने कहा कि देखो यह लड़की असल है मै लिखकर देता हूँ चन्दन ने कहा ठीक है महाराज । मुझे घर बनाने के लिये अच्छी सी जगह चाहिये जहाँ मै अपने बच्चों को ठीक ठाक सुरक्षित जगह पर रख सकूँ राजा ने कहा जहाँ चाहों बना सकते हो तो फिर महाराज मुझे कोतवाली के सामने जगह दे दी जाय,राजा ने जमीन की मंजूरी दे दी अब चन्दन ने उस जगह पर एक आलीशान घर बनाया और फिर शादी शादी करके अपनी पत्नी को घर ले गया । वह व्यापार के सम्बन्ध मे कही ना कही जाता रहता था इसलिये उसने कोतवाल साहब को अपने घर पर दावत देना चालू किया ,कहीं जाता तो कोतवाल साहव से घर की देखरेख को कह जाते अब रोज कोतवाल साहब देख- रेख पर ध्यान रखते -रखते सेठानी जी से सम्बन्ध बना बैठे । इस बारे मे चन्दन सेठ को भी पता था तब उसने एक युक्ति बनाई और उसने राजा के लड़के का अपहरण करबा लिया और उसे एक सुरक्षित स्थान पर रखबा दिया तथा उसके आराम की हर व्यवस्था उपलब्ध करबा दी तथा उसके कपड़ों को उतार कर खून में रंगकर तथा कहीं से एक खोपड़ी लाकर कपड़ों के साथ अपनी सेठानी को देकर कहने लगा की तुम इसे संभाल कर रख लो और किसी को मत कहना कि राजा के लड़के को मैने मारा है । सेठानी ने चुपके से उसे रख लिया और किसी से भी ना बताने का वायदा किया ।
सेठ चन्दन फिर व्यापार के काम से चले गये और घर को कोतवाल साहब के हबाले करके चले गये अब शाम को जब सेठानी के पास कोतवाल साहब पहुंचे तो कोतवाल साहब का उदास चेहरा देखकर सेठानी ने उनसे उदास चेहरे का कारण पूंछा। कोतवाल ने कहा जान पर बन आई है राजा का लड़का लापता है जिसकी तलाश का कार्य मुझको सौपा गया है जो अभी तक नहीं मिला है ,सेठानी ने झट से कहा बस इतनी सी बात कोतवाल जी वो तो मै जानती हूँ कि ये सब तो हमारे सेठजी ने किया है ये लो राजा के लड़के के बस्त्र और खोपड़ी अब तो कोतवाल बहुत खुश हुआ और तुरंत जाकर यह सूचना राजा को दी । राजा बहुत दुखी हुआ और सेठ चन्दन को पकड़बाकर फांसी की सजा बिना कुछ पुछे ही तय कर डाली ।

अब चन्दन को फांसी के लिये ले जाने के लिये बाजार से रुसवा करते हुए निकाला गया उसी बाजार में एक तवायफ का कोठा था जो मुजरा भी करती थी और राजा के दरबार की खास नृत्यकि थी एक बार उसके कोठे पर चन्दन भी गया था और वहाँ उसने उसका ना ही नृत्य देखा और ना ही उससे कोई सम्बन्ध ही बनाया बल्कि मुजरा स्थल पर सो गया जब उस तवायफ ने उसको उठाने की कोशिस की तो वह नाराज हो गया और उस तवायफ की पिटाई कर दी और उससे कहा कि तुम मुझसे अलग रहो मै तो बस यूँ ही चला आया था और यह तुम्हारा नजराना वो भी दो गुना \ तवायफ चुप चाप अलग हो गयी । मगर वह उसको पहचान गयी कि यह एक नेक बन्दा है ।
उसने राजा के सैनिकों से कहा कि इस नेक बन्दे को कहाँ ले जा रहे हो ,तब सैनिकों ने कहा कि इसने राजा के पुत्र को मारा है तो तवायफ तुरंत राजा के पास गई और राजा से कहा कि यह बन्दा ऐसा काम कभी नहीं कर सकता क्रपया उससे पूर्ण जानकारी लें और तब उसको फांसी दें । राज नृत्यकि थी राजा ने उसकी बात मान ली और उसकी फांसी रोककर उसे दरवार मे हाजिर होने की बात कही, चन्दन को तुरंत हाजिर किया गया ।

चन्दन ने बताया कि महाराज आपका पुत्र शकुशल है और पुत्र को तुरंत बुलाया ,पुत्र को देखकर राजा बहुत खुश हुआ और गले लगा लिया, तब चन्दन ने कहा महाराज मै कोई सेठ नहीं बल्कि राजा राजा जगदीश सिंह का पुत्र कुँवर चन्दन सिंह हूँ राजा हैरान रह गया चन्दन ने कहा महाराज आप हैरान ना हों आप हमारे राज्य पर आक्रमण के लिए गये थे और हमने युद्ध से इन्कार कर दिया था तब आपने हमारे सामने चार सबाल रखे थे ,मै उनका जबाब देने के लिये ही आपके राज्य आया हूँ तो अब मै उनका जबाब देता हूँ जो मैने समय से पूरे कर लिये है और इनका मै जबाब देता हूँ ।

महाराज आपका प्रथम सबाल था – असल के कम असल?- इसका जबाब है महाराज आपने सेठजी की लड़की के साथ मेरी शादी करवाई और लिखकर दिया कि यह असल है मगर देखो यह तो कोतवाल से सम्बन्ध बना बैठी और असल के कम असल निकली ।

महाराज आपका दूसरा सबाल था – कम असल के असल ?-महाराज यह देखो तवायफ है जिसके साथ मैने एक रात गुजारी मगर मैने इससे बिना मुजरा या कोई सम्बन्ध बनाये और नजराना पूरा दिया उसके बदले इसने अहसान चुकाया और मेरे लिये आपसे विनती की तो यह कम असल होते हुए भी असल निकली ।

महाराज आपका तीसरा सबाल था – सराय का कुत्ता ?-महाराज आपका कोतवाल जिसकी मैने खूब खिलाया -पिलाया और घर की देखरेख के लिए बोल रक्खा था और देखो इसने सराय के कुत्ते की तरह ही मेरी घरवाली को झूठा कर डाला महाराज बास्तव मे यह कोतवाल सराय का कुत्ता है जिसका कोई भरोशा नहीं ।

महाराज आपका चौथा सबाल था – धोबी का गधा –महाराज आप बुरा नहीं मानना धोबी का गधा हैं आप ,महाराज क्योकि आप बिना कुछ सोचे समझे ही आपने मुझे सजा दे डाली जबकि आपको तो सम्पूर्ण जानकारी लेने के बाद ही किसी बात का फैसला लेना चाहिए था महाराज ।
तो महाराज मैने आपके चारो सबालों का जबाब आपके समक्ष रख दिये हैं ,अब हमें माफ़ करें ,महाराज अब मै अपने राज्य को चलता हूँ । राजा की आंख खुल गई और उसने चन्दन से क्षमा याचना करते हुए अपनी पुत्री का हाथ थमाकर ससम्मान सहित विदा किया ।

लेखक डॉo हिमांशु शर्मा (आगोश )

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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
June 19, 2013

बहुत बढ़िया और रोचक प्रस्तुति !

priti के द्वारा
June 15, 2013

रोचक कथा .. हार्दिक बधाई ! डॉ हिमांशु जी …

shalinikaushik के द्वारा
June 15, 2013

बहुत सार्थक रहे प्रश्नों के उत्तर .लाजवाब प्रस्तुति .बधाई

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
June 15, 2013

बहुत सुन्दर रचना /

Manisha Singh Raghav के द्वारा
June 15, 2013

हिमांशु जी , सादर नमस्कार आपका लेख पढ़ा । आपने मुझे मेरी दादी जी , दादा जी की याद दिला दी । कभी इसी तरह की कहानियां मेरे दादा दादी सुनाया करते थे । लेकिन आजकल तो कहानियां तो छोड़ दादा दादी भी हवा हो गये । यादों के सागर में ले जाने का बहुत बहुत शुक्रिया । आप मेरे ब्लॉग पर अपनी नजरें इनायत कीजिए । एक मेरी नई कविता ” जंग ” पर निगाह डालिए जिसमें आपको सैनिकों की और उनके परिवारों की जिन्दगी के बारे में पता चलेगा ।

bhanuprakashsharma के द्वारा
June 14, 2013

रोचक कहानी। आपका यह अंदाज पसंद आया। 


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