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'नेतृत्व' का पतन'

Posted On: 24 Aug, 2012 Others में

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तिरंगा कह रहा है, शहीदों की चिताओं से


ये आजादी नहीं है लूट का एक बहाना है।
राष्ट से द्रोह है गरीबों को मिटाना है ।
नहीं है आँखों में पानी घडियाली आँसू बहाना है।
कितने मारे गये हैं लोग कफ़न बिन लाश ढोना है।
सजाकर अपनी कुर्सी को ये नेता बैठे हैं मकानों में।
आगे चल सकेगा ना देश इनके बताने में।

तिरंगा कह रहा है, शहीदों की चिताओं से— (1)

नहीं अब लाज है इनको नाही कोई काम करना है।
लूट कर इस देश को विदेशी बैंक भरना है ।
योजनाओं के बहाने धोखा दे देश को खाये जाते हैं।
नेताओं की लूट की गिनती शुरू होती करोड़ों में।
नहीं जाकर खत्म होगी, ये राष्ट के मिट जाने में।
धुँआ सा उठ रहा है, आजादी की मीनारों में।

तिरंगा कह रहा है, शहीदों की चिताओं से— (2)

रोजगारों की कमी करके, बेरोजगारी बढ़ाते हैं।
आरक्षण का हौआ हर जगह, उच्च शिक्षा को नीचे गिराते हैं।
ना उम्मीद है बाकी हर जगह,योग्य पर अयोग्य को हावी बनाते हैं।
करते फिरते हैं रोज वायदे,सिर्फ जनता को उल्लू बनाते हैं।
नेता कर सकेंगे कहाँ तक बेवफाई जमाने में।
नहीं अब चल सकेगी ये संसद संविधान के बताने में।

तिरंगा कह रहा है, शहीदों की चिताओं से—- (3)

उठो तुम नौजवानों और बता दो झूठ कैसे रोती है।
मांग कर भीख वोटों की,फिर पांच साल मौज करते हैं।
खादी व खाकी वर्दी मिलकर जनता को रुलाते हैं।
घोटाले व भ्रष्टाचार अन्याय के रोज मैडल सजाते हैं।
पकड़ लो मजबूत तुम झंड़ा तिरंगा नहीं आना किसी के बहाने में।
छीन लो अपनी आजादी नहीं जाना हमको गुलामी में।

तिरंगा कह रहा है, शहीदों की चिताओं से— (4)

लेखक डॉo हिमांशु शर्मा (आगोश)

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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Himanshu Nirbhay के द्वारा
September 4, 2012

सर, दंडवत प्रणाम इस उत्तम कृति के लिए… शब्द नहीं है धन्यबाद के लिए —–

    annurag sharma(Administrator) के द्वारा
    September 5, 2012

    धन्यबाद निर्भय जी,आपका आभार मै किन शब्दों से करूं ,,,,,,,,,,श्री मान जी हमारा हमारा एक ब्लॉग हिमांशु शर्मा(आगोश ) के नाम से भी है उसपे भी क्रप्या एक नजर जरुर डाले ,,,,,,,,,,

Chandan rai के द्वारा
August 28, 2012

अनुराग जी , देशभक्ति पर पढ़ी हाल फिलहाल की सबसे बेहतरीन रचना ! ये आजादी नहीं है लूट का एक बहाना है। राष्ट से द्रोह है गरीबों को मिटाना है । नहीं है आँखों में पानी घडियाली आँसू बहाना है। कितने मारे गये हैं लोग कफ़न बिन लाश ढोना है। सजाकर अपनी कुर्सी को ये नेता बैठे हैं मकानों में। आगे चल सकेगा ना देश इनके बताने में। तिरंगा कह रहा है, शहीदों की चिताओं से— (1)

    annurag sharma(Administrator) के द्वारा
    August 28, 2012

    श्रीमान जी नमस्कार , आपकी सहमती के लिये कोटि -कोटि धन्यबाद ,,,,,

    annurag sharma(Administrator) के द्वारा
    August 28, 2012

    श्रीमान जी नमस्कार,     , आपकी सहमती के लिये कोटि -कोटि धन्यबाद…..

vikramjitsingh के द्वारा
August 27, 2012

वर्तमान परिवेश पर सटीक कटाक्ष किया है…… सादर…..आदरणीय अनुराग जी……

yogi sarswat के द्वारा
August 27, 2012

रोजगारों की कमी करके, बेरोजगारी बढ़ाते हैं। आरक्षण का हौआ हर जगह, उच्च शिक्षा को नीचे गिराते हैं। ना उम्मीद है बाकी हर जगह,योग्य पर अयोग्य को हावी बनाते हैं। करते फिरते हैं रोज वायदे,सिर्फ जनता को उल्लू बनाते हैं। नेता कर सकेंगे कहाँ तक बेवफाई जमाने में। नहीं अब चल सकेगी ये संसद संविधान के बताने में। तिरंगा कह रहा है, शहीदों की चिताओं से—- (3) बहुत सटीक , स्वाभाविक एवं सार्थक रचना शर्मा जी ! ये सब जानते हैं किन्तु समझने को तैयार नहीं होते ! क्या यही भविष्य था भारत का ?

akraktale के द्वारा
August 26, 2012

पकड़ लो मजबूत तुम झंड़ा तिरंगा नहीं आना किसी के बहाने में। छीन लो अपनी आजादी नहीं जाना हमको गुलामी में। तिरंगा कह रहा है, शहीदों की चिताओं से वाह बहुत ही सुन्दर कविता से परिचय कराया है आपने अनुराग जी.आभार.

    annurag sharma(Administrator) के द्वारा
    August 27, 2012

    श्रीमान जी, आपकी सहमती के लिये कोटि -कोटि धन्यबाद ,

    annurag sharma(Administrator) के द्वारा
    August 27, 2012

    श्रीमान जी, आपकी सहमती के लिये कोटि -कोटि धन्यबाद -,,,

yogi sarswat के द्वारा
August 25, 2012

नहीं अब लाज है इनको नाही कोई काम करना है। लूट कर इस देश को विदेशी बैंक भरना है । योजनाओं के बहाने धोखा दे देश को खाये जाते हैं। नेताओं की लूट की गिनती शुरू होती करोड़ों में। नहीं जाकर खत्म होगी, ये राष्ट के मिट जाने में। धुँआ सा उठ रहा है, आजादी की मीनारों में। तिरंगा कह रहा है, शहीदों की चिताओं से— (2) बहुत सुन्दर शब्द अनुराग शर्मा जी ! सही कहा आपने

    annurag sharma(Administrator) के द्वारा
    August 26, 2012

    श्रीमान जी, आपकी सहमती के लिये कोटि -कोटि धन्यबाद ,,

jlsingh के द्वारा
August 25, 2012

अनुराग साहब/ हिमांशु साहब, नमस्कार! आपकी बेहतरीन पंक्तियों मे मैंने भी कुछ शब्द जोड़े हैं मांग कर भीख वोटों की,फिर पांच साल मौज करते हैं। खादी व खाकी वर्दी मिलकर जनता को रुलाते हैं। घोटाले व भ्रष्टाचार अन्याय के रोज मैडल सजाते हैं। पकड़ लो मजबूत तुम झंड़ा तिरंगा नहीं आना किसी के बहाने में। छीन लो अपनी आजादी नहीं जाना हमको गुलामी में। तिरंगा कह रहा है, शहीदों की चिताओं से— (4) तुम्हारा खून शानी था अब पानी नहीं मिलता! अगर मिलता है पानी तो जवानी नहीं मिलता! बिके सब लोग देखो आज निशानी तोड़ दी तेरी! सो जा तू खुशी से कब्र में बेचैन न होना भला इस देश का क्या हो अब तो सिर्फ है रोना!

    annurag sharma(Administrator) के द्वारा
    August 25, 2012

    सिंह साहब कोटि -कोटि प्रणाम ,आपकी पंक्तियो को पढ़कर मुझे बड़ी ख़ुशी हुई,अब तो इस जलिम तंत्र मे रोने के अलावा और कुछ नहीं है, पहले हम अंग्रजो के गुलाम थे।अब इस भ्रष्टतंत्र के ,,,,,,,,

dineshaastik के द्वारा
August 25, 2012

आदरणीय अनुराग जी, सादर नमस्कार। तिरंगा की पीडा की वास्तविक अभिव्यक्ति। बिना व्यवस्था परिवर्तन के इन सबसे निजात मिल पाना बहुत असंभव है और व्यवस्था परिवर्तन के लिये सभी राजनैतिक पार्टियों को हराना जरूरी है। http://dineshaastik.jagranjunction.com/2012/08/21/ज्योतिषी-जी-एवं-ओझा-जी-की-प/

    annurag sharma(Administrator) के द्वारा
    August 25, 2012

    दिनेश साहब कोटि -कोटि प्रणाम ,,अब तो इस जलिम तंत्र मे रोने के अलावा और कुछ नहीं है, पहले हम अंग्रजो के गुलाम थे।अब इस भ्रष्टतंत्र के ,,,,,,,,

nishamittal के द्वारा
August 24, 2012

देश की स्थिति के प्रति पीड़ा का बखान करती सुन्दर रचना.

    annurag sharma(Administrator) के द्वारा
    August 24, 2012

    निशा जी ,इस मर्म को जब सब समझेंगे तो ही उद्धार हो सकेगा , सहयोग के लिये कोटि -कोटि धन्यबाद ,


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