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'चार छंद' (छुट भईया नेता)

Posted On: 22 Aug, 2012 Others में

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‘किसकी हो सरकार हमें क्या लेना देना,
अपना हो जाय काम हमें बस यही रोना ‘।

नित उठ करें प्रणाम राष्ट हमें भ्रष्ट बतावें ।
बिन नेता गिरी कैसे जियेंगे यही दुख हमें सतावें।
कितने हम बेचैन हमारा बेहाल बतावें।
सत्ता मे कानाफुंसी करें हमें दलाल बतावें ।

(1)

कुर्ता मैला हो गया साबुन ने सुध बिसराई ।
दुर्गती होती देख नील ने आंख चुराई।
किससे करें पुकार अपनों ने सुध बिसराई।
नेता नाम गाली बना वक्त नें ली अंगड़ाई ।

(2)

नेता हुए गिरफतार याद आ रही अम्मा।
पैदा हुए कपूत कह रहा गली का जुम्मा।
लेकर हम से वोट झूठ बोल गया निकम्मा।
होकर रहेगा बंद जेल मे गायेगा राजनीति का नगमा।

(3)

लूट लिया देश को सोये मीठी तान ।
ऐसे देश लुटेरों से कैसे बचे हिंदोस्तान।
लगे जनता की वदुआ खाये कैद मसान।
जीते जी घर इनका बन जाये शमशान।

(4)

लेखक डॉo हिमांशु शर्मा (आगोश )

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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
August 24, 2012

नेता हुए गिरफतार याद आ रही अम्मा। पैदा हुए कपूत कह रहा गली का जुम्मा। लेकर हम से वोट झूठ बोल गया निकम्मा। होकर रहेगा बंद जेल मे गायेगा राजनीति का नगमा। सुन्दर शब्दों में लपेट लपेट कर मारा है आगोश साब ! बहुत खूब ! अच्छा लगा

    annurag sharma(Administrator) के द्वारा
    August 24, 2012

    श्रीमान जी, आपकी सहमती के लिये कोटि -कोटि धन्यबाद ,,,

akraktale के द्वारा
August 23, 2012

आदरणीय          सादर, राजनीति और राजनेताओं पर सुन्दर छंदात्मक काव्य लिखने का प्रयास किया है आपने. बधाई.

rekhafbd के द्वारा
August 23, 2012

अनुराग जी लूट लिया देश को सोये मीठी तान । ऐसे देश लुटेरों से कैसे बचे हिंदोस्तान। लगे जनता की वदुआ खाये कैद मसान। जीते जी घर इनका बन जाये शमशान।,वर्तमान हालत पर अति सुंदर छंद रचे है आपने ,बधाई

bhanuprakashsharma के द्वारा
August 23, 2012

आपने वर्तमान राजनीति का मुखौटा उतारकर सबके सामने रख दिया। बधाई। 

aman kumar के द्वारा
August 22, 2012

बहुत ही अच्छा कहा आपने !!

nishamittal के द्वारा
August 22, 2012

राजनीति की वर्तमान स्थिति पर आपके आक्रोश युक्त छंद अच्छे लगे.


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